भृगु संहिता से ज्योतिरादित्य सिंधिया का फलादेश!

भृगु संहिता से ज्योतिरादित्य सिंधिया का फलादेश!

यह जातक राजसी परिवार से तालुक्क रखता है! जिस जातक की कुंडली में ऐसे ग्रह पढ़े हो वह जल्दी ही गुस्से में आ जाता है और जल्दी ही शांत हो जाता है ,इस जातक के जीवन में बचपन जवानी, बुढ़ापे कभी भी अलप [कष्ट ] न आए ! १६ से २४ वर्ष के मध्य में मन मैं कुछ करने के लिए सागर की लहरों की तरह तरंगे उठी। ! पढ़ने में चतुर बुद्धि ! पिता का सुख कम हो! पेट संबधी रोग हो सकते हैं ! सारी जिंदगी राजसी सुख भोगे !
१] १,२,३ वर्ष में पिता को तरक्की मिले!
२] ४से ५ वर्ष में भी उसके पिता को कार्य क्षेत्र में तरक्की मिले !
३] ७;८;९ साल में पढाई शुरू हुई और पेट संबधी रोग हुआ !
४] ११;१२;१३;१४ वर्ष के मध्य पढाई में थोड़ी मुश्किल रही और साधारण ही रही !
५] १५;१६;१७;१८ वर्ष में माता ,पिता को कष्ट हुआ!
६]१७;१८;१९ वर्ष के मध्य पढाई में परेशानी रही पर पिता को तरक्की मिले!
७]२१ ,२४ वर्ष में राजनीति में रूचि पैदा हुई !
८ ] २५,२६,२७ किसी का प्रति आकर्षण पैदा हुआ!!पर राजनीति में संघर्ष रहा!
९] २७,२८,२९ में पिता को कष्ट हो सकता है
१०]३१ से ३४ साल में गृहस्थी का सुख भोगा !
११] ३३-३६-३७ वर्ष साधारण रहे!
१२] ३८-३९-४० साल राजनीति मे राह बननी शुरू हो गयी !
१३] ४१-४२-४३ साल में राजनीति में बहुत नाम कमाया !
१४]४४-४५-४६ साल भी राजनीति में अच्छा रहा!
१५] ४७ -४८-४९ वर्ष में जिंदगी में उत्तराव होना शुरू हुआ!
१६]५१-५२-५३-५४ राजनीति में संघर्ष रहा !
१७] ५३-५४ में राजनीति में विपरीत परिस्थिति रही !
१९] ५५-५६ वर्ष में जिंदगी में विषाद पैदा हो सकता है ! मान सम्मान को ठेस पहुंचेगी !
२०] ५७-५८-५९ साल में शारीरिक कष्ट हो सकता है !मन में विषाद उत्त्पन हो सकता है ! तथा मन अस्थिर हो जाए !
२१]६१-६२-६३-६४ में फिर मान सम्मान मिलेगा !संतान को मान सम्मान मिले !
२२]६५-६६-६७ में स्वास ,हृदय , गुदा रोग हो सकते हैं !
२३]इसके उपरांत आयु सुख पूर्ण है !