संगीत और तबला जगत के महान गुरु उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के निधन का भृगु संहिता ज्योतिष से कुंडली विवेचन!

संगीत और तबला जगत के महान गुरु उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के निधन का भृगु संहिता ज्योतिष से कुंडली विवेचन!

तबला जगत के महान जादूगर गुरु उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का निधन १५-१२-२०२४ को अमेरिका में फेफड़े के गंभीर रोग के कारन निधन हो गया। जिस समय उनका निधन हुआ वह ७३ साल के थ। मेने भृगु ज्योतिष मै भिन भिन प्रकार की पद्धति पर काम किया है। भृगु ज्योतिष की ये

पद्धति गुरु आर जी रओ पद्धति पर आधारित है। ज़ाकिर हुसैन की ये कुंडली पूर्ण रूप से सही नहीं कही जा सकती । पर दिन की ग्रह स्तिथि से पूर्ण रूप से भृगु ज्योतिष का गणित किया जा सकता है। ज़ाकिर हुसैन का जनम ९-३-१९५१ में ११ बजे मुम्बई ,में हुआ था।

ग्रह की १५-१२-२०२४ दिन की स्तिथि इस प्रकार है।

राशि १,५,९ में केतु ही विराजमान है।

राशि २,६,१० में वक्री शनि विराजमान है ।

राशि ३,७,११, में बुध ,सूरज,राहु,बृहस्पति क्रम डिग्री के अनुसार।

राशि ४,८,१२ में चन्दर ,मंगल,शुक्र क्रम डिग्री के अनुसार।

इनकी मृत्यु के समय

शनि गोचर में कुंभ राशि [३,७,११ ]के त्रिकोण को संक्रमित कर रहा है । [बुध +सूरज+राहु+बृहस्पति। गोचर के शनि जो की कर्म की अंतिम गति को दिखा रहा। शनि कुंभ राशि में संक्रम कर रहा है। कुंभ राशि के स्वामी जनम के शनि कुंभ राशि से अस्टम भाव में कन्या राशि में विराजमान है जो की कर्म के अंतिम पड़ाव दिखा रहा है। [ये मृत्यु का समय कुंडली में दिखलाता है ]

राहु केतु गोचर में कन्या मीन राशि में विराजमान है। केतु की डिग्री मृत्यु के समय ८ डिग्री ४१ मिनट जो की जनम के शनि को काल का ग्रास बना रहा है। नोट जनम के शनि की डिग्री ६ डिग्री ४१ मिनट है।

गोचर के राहु की डिग्री ८ डिग्री ४१ मिनट है। ये गोचर में जनम के बृहस्पति जो की कुंभ राशि में २६ डिग्री ३३ मिनट के है। उसके आगे सिर्फ राहु गोचर में मीन राशि जनम के बृहस्पति को काल के ग्रास बनाने आ रहा है !

नोट :यही सही भृगु ज्योतिष की गणना है ।

गोचर का बृहस्पति ज़ाकिर हुसैन के निधन के दिन वृष राशि में संचार कर रहा था। वृष राशि का स्वामी उच्चा का मीन राशि में मंगल व चन्दर्मा का सात बैठा है। बृहस्पति गोचर में जनम के शनि से दृष्ट है। शनि भृगु ज्योतिष में करम के आलावा बीमारी और बाधा का भी करक है। अगर वृष राशि को लगन बना दे तो वृष राशि का स्वामी शुक्र १२ भाव के स्वामी मंगल के साथ विराजमान है। १२ भाव जीवन का अंत भी दर्शता है।